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Thursday, December 10, 2009

ब्रेकिंग न्यूज़

उस दिन यूँ ही शाम को तिवारी जी के घर चले गए ..तिवारी जी हमारे पड़ोसी ,ज्ञानवान और गुणवान ,यूँ कि हरफनमौला समझिये ..ड्राइंगरूम में घुसे तो देखा महाशय उदास से बैठे रिमोट के बटन दबा रहे थे । हमने पूछ लिया ``क्या हुआ तिवारी जी ..इतने उदास क्यूँ हैं? क्या भाभी जी ने चाय नहीं बनाई ?..सुनते ही उखड गए .तुम तो मियाँ बस खाने पीने से आगे कुछ सोचोगे ही नहीं ..यहाँ देश दुनिया कि चिंता में घुले जा रहे हैं और तुमको चाय की पड़ी है। देखा नहीं एक कर्मयोगी पत्रकार चला गया इस दुनिया से। ..अच्छा प्रभाष जोशी जी की बात कर रहें हैं आप ..हमने पूछा. ..``शुक्र है इतना तो याद है तुमको ..अब कितने योध्दा बचे हैं उन जैसे । मीडिया को जो सम्मानजनक स्थान उन्होंने दिलाया अब कहाँ?? हमने प्रतिवाद किया `` क्यूँ आज मीडिया तो और भी बलवान है उनके वक्त से । देखते नहीं हैं कितने नेताओं अफसरों को हिला कर रखा है ..रोज कोई न कोई सनसनी पैदा हो ही जाती है । ..``वही तो मियाँ सनसनी ही तो पैदा की जा रही है अब..समाचार कहाँ हैं ?.व्यथित होकर बोले वो..समाचार पत्र केवल पेज ३ के कारण बिक रहा है..औए न्यूज़ चैनल तो पूरे के पूरे ही पेज ३ हो गए हैं ..वही ह्त्या ,बलात्कार,भूत ,अन्धविश्वाशों की चाशनी में लपेट कर कुछ भी परोस दो जनता को ..फ़िर चाहे सबसे तेज चैनल हो या सबसे आगे हो..समाज और पत्रकारिता का मजाक बना दिया है ..वो दिन और थे जब तहलका काण्ड ,ठक्कर कमीशन ,बोफोर्स काण्ड ने राजनीति और समाज में परिवर्तन ला दिए..अब तो बस समाचार पत्र मैगजीन बन गए हैं और न्यूज़ चैनल मनोहर कहानी और सत्य कथाएं। ..नहीं तिवारी जी ..हमने समझाने की कोशिश की ..अच्छाई बुराई तो तो समाज के प्रत्येक अंग में है ..इसमें केवल मीडिया दोषी क्यों? अब २४ घंटे चालू रहेंगे तो बेचारों को कुछ तो चाहिए देने को ..वरना विज्ञापन कहाँ से आयेंगे? और रहे समाचार पत्र तो उनका तो मुकाबला और भी कड़ा है, अब टीवी से लोहा लेना है तो कुछ मसाला तो देना होगा नहीं तो भूतपूर्व हो जाएंगे औरों की तरह.,ये अर्थशाश्त्र का गणित है बंधु..अन्यथा अभी भी ऐसे लोग नहीं हैं क्या यहाँ जिनके एक लेख या स्टोरी से मंत्रियों के ताज उतर गए ,भ्रष्टाचार की पोल खुली यथा नरेगा हो या मधुकर कोड़ा ..। सुनकर थोड़ा शांत हुए मित्रवर..बात तो सही है दोस्त पर पहले से तुलना करता हूँ तो पाता हूँ कि मीडिया की बिल्डिंग तो बहुत भव्य और विशाल हो गई लेकिन नींव कमजोर होती जा रही है.. हमने उनको दिलासा देने कि कोशिश की..ऐसी बात नहीं हैं तिवारी जी..नई विधाएं आ रही हैं तो कुछ तो परिवर्तन होगा ही ..समय के साथ आगे बढिए ..समाज को अब नेट पत्रों से भी सामंजस्य बिठाना है ..आगे आने वाला युग तो उनका ही है..वहां भी कुछ भला बुरा पैदा होगा। एक ठंडी साँस लेकर तिवारी जी बोले`` ये तो है मियाँ ,वैसे भी इस समाज में अलख जगाने वाले की जरुरत तो हमेशा रहेगी चाहे वो किसी माध्यम से आए। इतनी देर में हम समझ गए की आज चाय का इन्तजार करना व्यर्थ है तो बहाना कर उठ लिए, जाते जाते जरा पलट कर देखा तो तिवारी जी अब शांत होकर टीवी पर बौलीवुड ग्लैमर देखने में मगन थे..कोई तेज खबरिया चैनल था शायद।