ज़िन्दगी में जो पल छूट गए
एक बार फिर से पाने हैं
तुम राह न देखना मेरी अभी
कुछ अधूरे काम निपटाने हैं.
इतने दिन जो चले साथ तेरे
मन की हर इक राह पर
वो राह भी खो गयी कहीं
फासले फिर वही तय कर जाने हैं.
हकीकत की बिजलियों से
जल गए जो ख्वाबों के दरख़्त
उन टुकड़ों को समेट लूँ ज़रा
वो एक बार फिर दफ़नाने हैं
दुनिया की इस भीड़ में
कमी नहीं है चेहरों की
नए दोस्त मिल जायेंगे तुम्हें
चलो अब उन पर सितम ढाने हैं.
टूट कर बिखर जाऊं
ऐसी नहीं मेरी फितरत
इस मन के वीराने में
कुछ नए पौधे फिर लगाने हैं.
टूटेगा आसमान से जब कोई सितारा
गुजरा वक़्त मांग लूँगा ज़रा
बना लूँगा उनको फिर अपना
तुमने कर दिए जो बेगाने हैं
इस गुस्ताख दिल की खता थी
समझ बैठा छिपे कुछ अफ़साने हैं,
आया है दौर फिर आवारापन का
अब ये दौर फिर से आजमाने हैं.
ज़िन्दगी में जो पल छूट गए
एक बार फिर से पाने हैं
तुम राह न देखना मेरी अभी
कुछ अधूरे काम निपटाने हैं.

1 comment:
Post a Comment